दिल के बोझ की गठरी संभल के उतारना
जीत को दूर जाते देख कर ही हारना
हारना मत इन आंसुओ से आसानी से
हो सके तो इन्हे दिल में ही मारना.
गठरी उतरी तो पल भर थकान मिट जायेगी
फिर चाहोगे सहारा, सूनी आंखे थक जायेगी
मत पालो इन वैशाखियो को अपने ज़हन में
ज़िन्दगी फिर बिन बैशाखी न चल पायेगी